दुग्ध उत्पादन में यूपी नंबर-1! नंद बाबा दुग्ध मिशन से हजारों को फायदा, डेयरी विभाग की स्वर्ण जयंती पर बड़ा कांक्लेव

लखनऊ: उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास विभाग की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर बुधवार को प्रदेश के सभी 75 जिलों में डेयरी कांक्लेव का आयोजन किया गया। दुग्धशाला विकास विभाग और पशुपालन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश की डेयरी उपलब्धियों, किसानों के लिए संचालित योजनाओं और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।

दुग्ध उत्पादन में उत्तर प्रदेश देश में सबसे आगे

कार्यक्रम में दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. ने बताया कि वर्ष 2024-25 में भारत करीब 248 मिलियन टन दुग्ध उत्पादन के साथ दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बना हुआ है। इसमें उत्तर प्रदेश का योगदान लगभग 38.8 मिलियन टन है, जिसके साथ राज्य देश में पहले स्थान पर है। उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, महिला सशक्तीकरण, रोजगार सृजन और किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है।

नंद बाबा दुग्ध मिशन से 17,994 लोगों को मिला लाभ

अधिकारियों के अनुसार नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत संचालित विभिन्न योजनाओं से अब तक 17,994 लोग लाभान्वित हो चुके हैं। वहीं 4,951 प्रारंभिक दुग्ध सहकारी समितियों के गठन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 2.25 लाख रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।

हजारों लाभार्थियों को मिले चयन पत्र

प्रदेश में मुख्यमंत्री स्वदेशी गो-संवर्धन योजना के तहत 2,100 नवचयनित लाभार्थियों, मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के 1,500 से अधिक तथा नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के 450 से अधिक लाभार्थियों को चयन पत्र वितरित किए गए। डेयरी क्षेत्र में 28 हजार करोड़ रुपये से अधिक के 829 निवेश समझौते भी किए गए हैं।

डेयरी नीति से बढ़ी प्रसंस्करण क्षमता और रोजगार

उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022 के तहत राज्य में प्रतिदिन 39 लाख लीटर दुग्ध प्रसंस्करण और अवशीतन क्षमता में वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही करीब 10 हजार नए रोजगार सृजित हुए हैं। निवेशकों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से लगभग 42 करोड़ रुपये का अनुदान भी उपलब्ध कराया गया है।

आधुनिक डेयरी तकनीकों पर दिया गया प्रशिक्षण

डेयरी कांक्लेव में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पशुपालन विभाग, कृषि विज्ञान केंद्रों, दुग्ध संघों के प्रतिनिधियों, प्रगतिशील दुग्ध उत्पादकों, पशुपालकों, स्वयं सहायता समूहों और दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्यों ने भाग लिया। कार्यक्रम में आधुनिक डेयरी तकनीक, वैज्ञानिक पशुपालन, पशु स्वास्थ्य, संतुलित पशु आहार और विभागीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी दी गई।

 

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